सफर ओम्कारेश्वर का

ओंकारेश्वर भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है।यह मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है यह स्थल मां नर्मदा के पावन तट पर स्थित है मां नर्मदा को मध्यप्रदेश की जीवनरेखा कहा जाता है।
                  ओमकारेश्वर भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। यह शिवजी के 12 श्रद्धालु ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मन्धात नामक द्वीप पर है।इस द्वीप का आकार "ॐ" आकार का है तथा यह द्वीप नर्मदा नदी में स्थित है अंतरिक्ष से देखने पर यह ॐ के आकार का दिखाई देता है।
                  ओंकारेश्वर का सफर इंदौर से शुरू होता है यह सफर एक अचानक बनी योजना का परिणाम थी।सफर शुरू होने के कुछ समय बाद ऊंची ऊंची हरियाली से ढकी हुई पर्वत की चोटी एक मनमोहक दृश्य सामने आता है जिसको बस एक पल के लिए ऐसा लगता है कि देखता ही रहूं।
                   चूकि इस सफर का रास्ता थोड़ा खतरनाक मतलब टेड़ा मेड़ा था कुछ अंधेमोड थे तो कुछ घाटियां परन्तु सफर बहुत ही रोमांचित करने वाला था रास्ते के एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ घाटी थी और जैसे जैसे आगे बड़ते जा रहे थे वैसे वैसे और भी रोमांचित करने वाली पल या यूं कह की हसी बादिया नजर आ रही थी।इन सभी पलों को अपने यादों के बस्ते में समेटते हुए हम ओम्कारेश्वर पहुंचते है।
                   ओंकारेश्वर पहुंच कर महाकाल के दर्शन किए और नर्मदा में नाव की सवारी का मजा लिया इतने दूर जाने के बाद भी बस एक ही बात का गम रहा कि उसके पास में स्थित इंदिरा सागर बांध को नहीं देख पाया लेकिन अब जो टूर होगा वो होगा इंदिरा सागर बांध का।
                    इस सफर में मुझे अपने पापा के साथ कुछ अच्छे पल बिताने का मौका मिला और अपने चाचा जी के साथ भी बहुत मौज मस्ती की।
                    यदि मुझे फिर से ओम्कारेश्वर जाने का मौका मिला तो मैं वो मौका कभी नहीं छोडूंगा।
                     इस यात्रा से ज़िन्दगी की यादों के बस्ते में कुछ  ऐसे पल आ गिरे की जिन्हें कभी भूल नहीं पाऊंगा।

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